हमारी कहानी

शुरुआत कहाँ से
राजकोट में एक चचेरे भाई के संगीत में, दिसंबर 2019. वह ऊँधियू की थाली सँभाले खड़ा था, किसी को देने का इरादा नहीं था. उसने फिर भी माँगा, और उसने पूरी थाली दे दी.

लंबा रास्ता
चार साल, दो शहर और बेशुमार देर रात की कॉल. हर दूसरे हफ़्ते अहमदाबाद से पुणे, जब तक हाइवे के ग्यारह घंटे सफ़र नहीं, घर लौटने का रास्ता न लगने लगे.

घर में बात
सैटेलाइट में एक इतवार की दोपहर चाय, और पहली बार दोनों घरों के माता-पिता एक कमरे में. दोनों माँओं ने पहले ही अंदाज़ा लगा लिया था, और पूरे बीस मिनट तक दोनों ने ऐसे दिखाया जैसे नहीं लगाया.

















